बवासीर बीमारी का इलाज

बवासीर की बीमारी   से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा माना जाता है कि इसका सबसे प्रमुख कारण हमारी खाने-पीने की आदतों में लगातार होने वाला बदलाव है । बवासीर होने का सबसे प्रमुख कारण यह है कि गुदा  के सबसे सबसे नीचे एक नस होती है जिसे हेमोरॉयड कहते हैं , विभिन्न कारणों से जब इस नस की दीवारें पतली हो जाती हैं तो इनसे खून रिसने लगता है, इस स्थिति को ही बवासीर कहते हैं । खून रिसने के साथ ही साथ  बवासीर के रोगी को असहनीय दर्द भी सहना पड़ता है । आपको कभी-कभी यह लग सकता है कि यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है परंतु यह सच नहीं है । वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बीमारी हर चार में से तीन लोगों को अपने जीवन में कभी ना कभी ये बीमारी होगी ही , सरल शब्दों में कहा जाए तो दुनिया में 75% लोग इस दर्द से कभी ना कभी गुजरेंगे ही । यह बीमारी किसी तरह का भेद नहीं करती, इसके द्वारा ग्रसित मरीजों में औरतों एवं मर्दों की संख्या समान है । इस बीमारी के विषय में जानकारी की कमी का कारण   यह है कि इस बारे में लोग बात करना पसंद नहीं करते । इसीलिए जानकारी के अभाव में भी कई लोग इस बीमारी का शिकार बन जाते हैं । 

जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है आपके बवासीर से ग्रसित होने  की संभावना में भी विस्तार होते जाता है । चिकित्सकों के अनुसार 45 से 65 वर्ष की उम्र के लोग इस बीमारी से सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं । बढ़ती उम्र के साथ इस बीमारी के होने के कारण इससे लड़ने की क्षमता भी धीरे-धीरे कम होती जाती है । जब आप जवान होते हैं तो आपका शरीर स्वस्थ होता है एवं इस तरह की बीमारी से लड़ने में बहुत हद तक सक्षम होता है , परंतु जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है आपकी  शरीर की आत्म सुरक्षा करने की क्षमता कम होती जाती है।, और ऐसे ही समय में यह बीमारी आपको अपना शिकार बनाती है ।

बवासीर दो तरह के हो सकते हैं आंतरिक या बाह्य । बाह्य बवासीर में खून बाहर आता है, एवं इसके आने के साथ अत्यंत दर्द का अनुभव होता है । आंतरिक बवासीर में खून का बहाव अंदर ही अंदर होता है , एवं वहां पर मस्तिष्क तक  दर्द की खबर पहुंचाने वाले तंत्रिका तंत्र का अभाव होता है इस कारण आपको दर्द नहीं होता । बाह्य अथवा आंतरिक बवासीर दोनों ही में खून का रिसाव होता है और दर्द हो या ना हो, शरीर का बहुमूल्य खून शरीर से बाहर जाता है । खून की लगातार कमी होने के कारण व्यक्ति की आत्मरक्षा की क्षमता भी लगातार कम होती जाती है । 

जहां तक इस बीमारी के इलाज की बात है तो सबसे पहले आपके दिमाग में एलोपैथिक इलाज ही आता है। हम भूल जाते हैं कि यह साधु संतों का देश है  ,पीर फकीरों का देश है । यह विश्व गुरु भारत है जहां की तंत्र विद्या के पास सभी बीमारियों के इलाज उपलब्ध हैं । हमें केवल इस ओर कदम बढ़ाना है और इन पर वैसे ही विश्वास करना है जैसा कि हम एलोपैथिक दवाइयों पर करते हैं । effectivehealings.com एक ऐसी ही जगह है जो तंत्र विद्या के द्वारा सिद्ध  उपचारों से आपकी सेवा के लिए तत्पर हैं । बवासीर एवं इसी की तरह अन्य बीमारियों का इलाज इन आध्यात्मिक माध्यमों के द्वारा न सिर्फ एलोपैथिक दवाइयों के मुकाबले जल्दी से से किया जा सकता है बल्कि इन बीमारियों को जड़ से मिटा सकने की ताक़त रखता है ताकि यह फिर से दोबारा आपको अपना शिकार ना बनाएं। इसी तरह के अन्य उपचारों के लिए effectivehealings.com  पर जाकर अपना स्वास्थ्य वर्धन करें।

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